*भगवानपुर रामलीला: लक्ष्मण ने सूर्णपखा की काटी नाक, रावण ने किया सीताहरण*

*सूर्णपखा: गुस्से में सीता पर प्रहार करने लगी, अजीवन दूसरा विवाह न कर सकने के लिए प्रतिज्ञाबद्ध हूं। जब सूर्णपखा ने लक्ष्मण के सामने प्रस्ताव रखा तो उन्होंने भी इंकार कर दिया। इससे वह गुस्से में सीता पर प्रहार करने लगी। तभी लक्ष्मण ने माता सीता को उससे बचाते हुए उसकी नाक काट दी थी। सूर्णपखा रोते हुए रावण के पास गई और वहां जाकर सब बात बताई। तब रावण ने गुस्से में सीता हरण की योजना बनाई*

*लक्ष्मण रेखा से बाहर आकर भोजन देने को कहा: साधु के रूप में रावण भोजन लेने सीता की कुटिया के पास आया और सीता से लक्ष्मण रेखा से बाहर आकर भोजन देने को कहा। जैसे ही सीता भोजन देने लक्ष्मण रेखा से बाहर आईं रावण ने सीता का अपहरण कर लिया*
भगवानपुर:- रामलीला शोभा सदन रंगमंच में आजादी से पहले 125 वर्ष से चली आ रही रामलीला का बीती रात आठवें दिन सोमवार को कलाकारों द्वारा सुरपनखा की नाक काटने और सीता हरण की लीला का मंचन किया।

भगवान राम, लक्ष्मण और सीता पंचवटी में आश्रम बनाकर रहते हैं। लंका के राजा रावण की बहन सूर्पणखा आकाश मार्ग भ्रमण कर रही थी। अचानक वह राम, सीता और लक्ष्मण को देखती है और पंचवटी आश्रम में उतर कर राम के अनुज लक्ष्मण को विवाह करने के लिए विवश करती है, जिससे क्रोधित होकर लक्ष्मण कटार निकालकर सूर्पणखा की नाक काट देते हैं।

सूर्पणखा ने घायल अवस्था में अपने बड़े भैया लंका के राजा रावण के दरबार में पहुंच कर आपबीती सुनाई। इसी बात का प्रतिशोध लेने के लिए रावण पुष्पक विमान से पंचवटी आश्रम पहुंचकर मामा मारीच को बुलाकर सोने का हिरन बनकर आश्रम के बगल में विचरण करने को कहता है सोने के हिरन को देखकर सीता मोहित हो जाती हैं। भगवान राम से कहती हैं, प्रभु मुझे सोने का हिरन चाहिए, उसकी खाल पर बैठकर पूजा करूंगी।

भगवान श्री राम विवश होकर सोने के अद्भुत हिरन का पीछा करते-करते घने जंगल में चले जाते हैं। जैसे ही हिरन पर बाण चलाते हैं। हिरन मनुष्य रूप धारण कर हाय लक्ष्मण, हाय लक्ष्मण की आवाज निकालने लगता है। यह आवाज सुनकर सीता लक्ष्मण को पति भगवान राम को बचाने के लिए कहती हैं। इधर अवसर पाकर रावण साधु का रूप धारण कर आश्रम में प्रवेश करना चाहता है, लेकिन जब रेखा को लांघकर अंदर जाना चाहता है, तो अग्नि जलने लगती है। काफी प्रयास करने के बाद रावण बाहर से ही आवाज लगाता है। भिक्षामि देही, भिक्षामि देही आवाज सुनकर सीता रेखा से बाहर निकलती हैं, तो सीता को पुष्पक विमान में बैठाकर लंका के लिए रवाना हो जाता है।
मंचन में रावण की भूमिका सुनील कुमार शर्मा, मेघनाथ की भूमिका विनीत शर्मा, सूर्पणखा की भूमिका विकास शर्मा, मारीच की भूमिका राजपाल धीमान, राम की भूमिका मनोज धीमान, लक्ष्मण की भूमिका सुशील पाल, सीता की भूमिका जुगनू के अलावा अन्य कलाकारों ने भी अभिनय किया।

इस मौके पर श्री शोभा सदन रंगमंच रामलीला समितिकेआयोजक,गोयल ब्रदर्स, शरण भवन, भगवानपुर, पंडित जगन्नाथ, भूपेंद्र सिंघल आदि मौजूद रहे।
(श्री शोभा सदन रंगमंच मीडिया प्रभारी सुनील उर्फ कुक्कू पंडित)




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